महाराष्ट्र की सहकारी बॅकों द्वारा गृहनिर्माण कार्य हेतु किए गए योगदान का मूल्यांकन
डॉ. राजेश बहुरूपी,
भिवापूर महाविद्यालय,
भिवापूर
Published in 31 Dec 2025
Abstract
देश के आर्थका ववकास में सहकारी बकैं ों का अत्र्ांत महत्वपूणा र्ोगदाि रहा है। “ववकससत भारत 2047” के पररप्रेक्ष्र् में भी सहकारी बकैं ों की भूसमका अत्र्ांत निणाार्क ससद्ध होिे वाली है। इस ववकास प्रकिर्ा में वाणणज्यर्क बैंक, सहकारी बैंक तथा निजी बैंक—इि सभी का महत्व निववावाद है समाज में भोजि, वस्त्र और आवास र्े मािव की मूलभूत आवश्र्कताएँहैं। इि आवश्र्कताओां की पूनता के सलए मिुष्ट्र् निरन्तर प्रर्ासरत रहता हैतथा अपिी सुववधा एवां क्षमता के अिुसार व्र्वसार्, उद्र्ोग र्ा िौकरी के माध्र्म से इन्हें पूरा करिे का प्रर्त्ि करता है। तथावप प्रथम दृष्ट्टर्ाआवासका प्रश्ि अत्र्ांत गांभीर रूप में उभरकर सामिे आता है, क्र्ोंकक एक सामान्र्
व्र्ज्क्त के सलए स्त्वर्ां का घर बिािा सहज िहीां होता। िौकरी करिे वाला व्र्ज्क्त भी
जीविभर की कमाई लगाकर ही अपिा घर बिा पाता है। र्ही कारण है कक ववसभन्ि बैंक िागररकों को गहृ -निमााण हेतुऋण उपलब्ध कराते हैं। इस उद्देश्र् से वाणणज्यर्क बकैं , सहकारी बैंक तथा निजी बैंक—सभी प्रकार की सांस्त्थाएँगहृऋण प्रदाि करती हैं।
ववशेषतः सहकारी पतसांस्त्थाओां िे वतमा ाि समर् की आवश्र्कताओां को ध्र्ाि में रखते हुए महाराष्ट्र में ककसािों को साहूकारों के चिव्र्ूह से मुक्त करािे में उललेखिीर् सफलता प्राप्त की है। एक समर् रायर् में ककसाि आत्महत्र्ा की घटिाएँ अत्र्र्धक थीां; परन्तुसहकारी बकैं ों की सहार्ताओां एवां हस्त्तक्षेप के कारण इसमें उललेखिीर् कमी आर्ी है। सहकारी बैंक व्र्ज्क्तगत ऋण, वाहि ऋण तथा गहृऋण सहहत ववसभन्ि प्रकार के ऋण उपलब्ध कराते हैं। ववशेषतः वे बडे पैमािे पर गहृऋण ववतरण में सकिर् भूसमका निभाते हैं। लघुएवां वांर्चत वगा के आर्थाक उत्थाि के सलए भारत में सहकार एवां सहकारी आांदोलि अत्र्ांत सफल ससद्ध हुआ ह